कोंडागांव सीट पर केबिनेट मंत्री मोहन मरकाम का हालत नाजुक

शशांक
बस्तर : ऐसे बस्तर संभाग की 12 सीटों में से कोंडागांव सीट पर इस बार पूर्व मंत्री और वर्तमान मंत्री का आमना-सामना हो रहा है। ऐसे इस कोंडागांव विधानसभा में भाजपा-कांग्रेस की सीधी टक्कर होने जारही है । जहाँ एक ओर इस सीट पर भाजपा की उम्मीदवार पूर्व मंत्री और वर्तमान में भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष लता उसेंडी चुनाव मैदान में हैं, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस से पूर्व पीसीसी चीफ और वर्तमान में केबिनेट मंत्री मोहन मरकाम खड़े हैं। इसके अलावा तीसरे मोर्चे के रूप में किसी का वजूद नहीं दिख रही है। कोंडागांव विधानसभा सीट पर जहां साल 2003 से भाजपा की लता उसेंडी विधायक रही हैं, वहीं 2008 में भी उनकी जीत का सिलसिला जारी रहा। इसके बाद साल 2013 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के मोहन मरकाम ने लता को हराकर विधायकी पर कब्जा किया और 2018 में भी वे दोबारा जीतकर आए। इस बार मोहन से उनके समर्थक और कार्यकर्ता कटे हुए हैं । मोहन समर्थकों व कार्यकर्ताओं ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि विधायक बनने के बाद वैसे भी मोहन मरकाम अपने कार्यकर्ताओं व समर्थकों से दूरी बनाकर रखे हुए थे, वहीं पीसीसी चीफ के रूप में ये दूरियां बढ़ती चली गईं। उन्होंने मोहन पर कार्यकर्ताओं की अनदेखी करने का आरोप भी लगाया है। ऐसे कार्यकर्ताओं ने अभी से ही मन में एहसास हो रहा है कि वे चुनाव हार रहें हैं। जिसके कारण कार्यकर्ताओं में कोई उत्साह नहीं दिख रहा है और न ही मोहन मरकाम के इर्द-गिर्द कार्यकर्ता ही नजर आ रहे हैं। दरअसल क्षेत्र से विधायक रहे मोहन मरकाम ने अपनी ही सरकार के खिलाफ विधानसभा में डीएमएफटी मद की राशि में बंदरबांट का मुद्दा उठाया था। इसके बाद पीसीसी चीफ के रूप में मोहन को मिली जिम्मेदारी भी छीन ली गई थी। हालांकि लोगों को इस बात का एहसास न हो कि मोहन के आरोपों के चलते उन्हें मिली चीफ की कुर्सी छीन ली गई है, इसलिए उन्हें एक विभाग का मंत्री बना दिया गया। कांग्रेस के विधायक होने के बावजूद नामांकन दर्ज करने के दौरान सीएम भूपेश बघेल कोंडागांव में मौजूद थे, जहां उन्होंने कोंडागांव के मोहन मरकाम और केशकाल के संतराम नेताम का नामांकन भरवाया था। इसके अलावे कांग्रेस का कोई भी बड़ा नेता कोंडागांव विधानसभा नहीं पहुंचा है। बीते दिनों हुई कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी की सभा भी केशकाल विधानसभा में आयोजित की गई। कुल मिलाकर कांग्रेस का कोई भी बड़ा नेता अब तक कोंडागांव विधानसभा में नहीं पहुंचा है। इस समय साफ दिख रहा है किर मोहन और भूपेश बघेल के बीच की दरार व्यापक है। जिसके कारण इस समय भाजपा भरपूर फायदा उठाने की कोशिश कर रही है। भाजपा की लता उसेंडी ने जहां इस बार जीत हासिल करने का दावा किया है, वहीं भाजपा के कार्यकर्ता भी इसके लिए लगातार जुटे हुए हैं। इसके साथ ही धन प्रवाह भी भाजपा में बढ़ गया है, जबकि कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने साफ तौर पर कह दिया है कि धन का प्रवाह नहीं होने से प्रचार में दिक्कत होगी। कोंडागांव सीट पर जातीय समीकरण भी कांग्रेस के लिए खासा बिगड़ा हुआ है। र्इसाई समुदाय से जुड़े लोगों ने इस बार आम आदमी पार्टी के साथ जाने की बात हो रही है। भाजपा लगातार धर्मांतरण के खिलाफ बोलती रही है और दूसरी ओर कांग्रेस ने इस मुद्दे पर ईसाई समुदाय पर साथ नहीं दिया। इन हालातों में ये समुदाय दोनों ही दलों से नाराज चल रहा है। यही कारण है कि आम आदमी पार्टी के साथ जाने की बात कही जा रही है। पिछले चुनावों पर नजर डालें तो साल 2003 में लता उसेंडी ने कांग्रेस के प्रत्याशी और पूर्व मंत्री शंकर सोढ़ी को 14 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था। जीत का सिलसिला उन्होंने साल 2008 में भी कायम रखा और कांग्रेस के मोहन मरकाम को उन्होंने करीब 2700 वोटों से पछाड़ा। इसके बाद साल 2013 में तस्वीर पूरी तरह से बदल गई और मोहन ने लता को करीब 5 हजार वोटों से हराया। साल 2018 में भी मोहन ने एक बार फिर लता को करीब 1700 वोटों से पछाड़ दिया था। इस बार की लड़ाई में दोबारा उलटफेर की स्थिति बनती दिखने लगी है। मालूम हो कि कोंडागांव विधानसभा सीट से भाजपा के लता उसेंडी और कांग्रेस के मोहन मरकाम के अलावा बहुजन समाज पार्टी से गिरधर नेताम, जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जोगी से शंकर नेताम, राष्ट्रीय जनसभा पार्टी से कंवलसिंह बघेल, भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी से जयप्रकाश नेताम, सर्व आदि दल हैं !ऐसे 3 दिसम्बर को असली तस्वीर स्पष्ट होगा

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